blog

Naksalwad की समस्या तथा समाधान | नक्सलवाद कैसे खत्म होग

Naksalwad
Written by Bhasha Basu

नक्सलवाद का समस्या तथा समाधान | Naksalwad Ki Samasya Essay | Racism Problem And Solution In Hindi

आज देश और विदेश में सबसे बड़ी समस्या Naksalwad की है दोस्तों आप ने Naksalwad के बारे में तो सुना होगा एवं नक्सलवाद से लोगों को कितना ज्यादा नुकसान हो रहा है यह भी आप भली-भांति जानते होंगे लेकिन आतंकवाद Naksalwad इतना फल फूल कैसे रहा है आज कई नक्सली संगठन वैधानिक रूप से स्वीकृत राजनीति पार्टी बन गए हैं और संसदीय चुनाव में भाग भी लेते हैं परन्तु बहुत से संघठन अब भी लड़ाई में लगे हुए हैं नक्सलवाद के विचारधारात्मक विचलन से सबसे बढ़ी मार आंध्रप्रदेश,छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखण्ड, और बीहार को झेलना पड़ा रहा हैं .

Naksalwad का जन्म एवं इतिहास | History of Naxalite

Naksalwad की उत्पत्ति पश्चिमबंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने नेता चारु मजूमदार और कानू सान्याल ने 1963 में सत्ता के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन सुरु किया मजूमदार चीन के कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बड़े प्रशंसक थे इस कारण नक्सलवाद को माओवाद भी कहा जाता हैं 1968 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ मार्कसिज्म एंड लेनिनिज्म (CPML) का गठन किया गया जिनके मुखिया दीपेंद्र भटाचार्य थे, ये लोग माकर्स और लेनिन के सिद्धांतों पर काम करने लगे। क्योंकि वे उन्हीं से प्रभावित थे

वर्ष 1969 में पहली बार चारु मजूमदार और कानू सान्याल भूमिअधिग्रहण को लेकर पूरे देश में सत्ता के खिलाफ एक व्यपाक लड़ाई सुरु कर दी। भूमि अधिग्रहण को लेकर देश में सबसे पहली आवाज नक्सलवाड़ी से ही उठी थी। आंदोलनकारी नेताओ का मानना था की जमीन उसी की जो उस पर खेती करे

Naksalwad कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों के उस आंदोलन का आनोपचारिक नाम हैं जो भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के फलस्वरूप उतपन्न हुआ

Naksalwad (नक्सलियों) के विरुद्ध चलाये गये अभियान | Campaigns against Naxalites

नक्सलियों के विरुद्ध चलाये गये अभियान – स्टीपेलचेस अभियान- यह अभियान वर्ष 1971 में चलाया गया था इस अभियान में भारतीय सेना तथा राज्य पुलिस ने भाग लिया था अभियान के दौरान लगभग 20,000 नक्सली मरे गए

ग्रीन हंट अभियान – यह अभियान 2009 में चलाया गया नक्सल विरोधी अभियान को यह नाम मिडिया द्वारा प्रदान किया गया था इस अभियान में पैरामिलिट्री बल एवं राष्ट्रीय पुलिस ने भाग लिया यह अभियान छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र में चलाया गया

प्रहार – 3 जून 2017 को छत्तीसग़ढ राज्य के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों द्वारा अब तक के सबसे बढ़े नक्सली विरोधी अभियान को प्रारंभ किया गया, इस अभियान में तीन जवान शाहिद हो गये तथा कुछ घायल हुए अभियान के दौरान 15-20 नक्सली मारे जाने की सूचना सुरक्षा बल के अधिकारियो द्वारा दी गई ख़राब मौसम के कारण 25 जून 2017 को इस अभियान को समाप्त किया गया.

भारत में Naksalwad की बड़ी घटनाएँ | Major incidents of Naxalism in India

नक्सलवाद की समस्या | Naksalwad Ki Samasya Essay In Hindi

• 2007 छत्तीसग़ढ के बस्तर में 300 से ज्यादा विद्रोहियों ने 55 पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया तथा

• 2008 उड़ीसा के नयागढ़ में 14 पुलिसकर्मियों और एक नागरिक की हत्या कर दी थी .

• 2009 महाराष्ट्र के गढ़चियोली में हुये एक बढ़े नक्सली हमले में 15 सीआरपीएफ जवानों की हत्या हो गई.

•2010 में नक्सलियों ने कोलकाता-मुम्बई ट्रैन में 150 यात्रियों की हत्या कर दी.


•2010 पश्चिमबंगाल के सिल्दा कैम्प में नक्सलियों ने 24 अर्धसैनिक बलों को मार दिया.


•2011 छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुए बड़े नक्सली हमले में 76 जवानों की हत्या कर दी गई.


•2012 झारखण्ड के गड़वा जिले के पास बरीगांव जंगल में 13 पुलिस कर्मियों को मर दिया गया.


•2013 छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने कांग्रेस के नेता के नेता समेत 24 लोगो को मार दिया था.

नक्सलवाद का जड़ से निदान कैसे किया जाए क्या हिंसावादियों के साथ हिंसा करना सही है

नक्सलवाद का जड़ से निदान, नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए हमें जाति धर्म इत्यादि को त्याग कर इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानना होगा पिछड़े गांव में आज भी शिक्षा की उत्तम व्यवस्था नहीं है वहां पर शिक्षा की उचित व्यवस्था करवाने से भी नक्सलवाद को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है पिछड़े इलाकों तथा गांव में आम लोगों के सुनने वाले कोई नहीं होते हैं इसलिए सरकार को उनकी उचित शिक्षा उचित व्यवस्था चिकित्सा इत्यादि का ध्यान रखना चाहिए.

निष्कर्ष

क्या हिंसा करने वालों के साथ हिंसा करना सही होगा क्या कुछ लोग बड़े पद का नाजायज उपयोग करेंगे जिससे आम जनता को जान तथा माल का नुकसान हमेशा उठाना पड़ेगा नक्सलवाद आज देश दुनिया में यूं ही पैदा नहीं हुआ है नक्सलवाद का संगठन अशिक्षा, जाति, धर्म, भेदभाव, उच्च वर्ग के लोग, नीचे वर्ग के लोग इत्यादि संकुचित ज्ञान के कारण शुरु हुआ है, ऐसे में शिक्षा ही मात्र एक ऐसा रास्ता है जिससे नक्सलवाद को जड़ से खत्म किया जा सकता है

Summary
Review Date
Reviewed Item
नक्सलवाद की समस्या | Naksalwad Ki Samasya Essay In Hindi
Author Rating
51star1star1star1star1star

About the author

Bhasha Basu

Hello friends, my name is Bhasha Basu and I like to write useful entertaining and interesting articles on the internet

Leave a Reply

.
%d bloggers like this: