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मां दुर्गा के भक्तों के जीवन को बदलने वाला 5 अनमोल विचार |

मां दुर्गा के भक्तों के जीवन को बदलने वाला 5 अनमोल विचार |
Written by Himanshu sonkar

नमस्कार दोस्तों आज मैं मां दुर्गा जगदंबा की आप सभी भक्तों के लिए अनमोल विचार प्रकट करने वाला हूं यह विचार आपके जीवन को सुख संपत्ति धन-धान्य से भर देगा इसे जीवन में अमल में लाए और जीवन को हर्षोल्लास से व्यतीत करें माता रानी अपने सभी भक्तों के लिए कहती है |

1 # हे दृष्टि वाले लोग क्या करें

मनुष्य भी बड़ा विचित्र प्राणी है वह अपने नीचे के स्तर के लोगों को हे दृष्टि से देखता है उनका उपहास उड़ाता है उनसे बार-बार कहता है कि तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता तुम भविष्य में कुछ नहीं कर पाओगे जब मनुष्य के पास धन संपत्ति मान होता है तो वह दूसरों का आदर नहीं करता हैं |

परंतु वह एक बात भूल जाता है कि उससे भी अधिक शक्तिशाली कोई अस्तित्व में है और वह है समय काल काल अपना चक्र कब बदलेगा यह कोई नहीं जानता समय अपनी करवट कब लेगा यह कोई नहीं जानता कोयला भी समय के साथ साथ हीरे में परिवर्तित हो जाता है इसलिए जीवन में कभी भी किसी भी का उपहास ना बनाएं |

2# अन्याय से कैसे लड़े

कभी-कभी आपके जीवन में एक विचित्र समय जरूर आता है की आपको शक्तिशाली के समक्ष मौन होना पड़ता है वह शक्तिशाली से विवाद करने से बचने के लिए आप मौन रह जाते हैं मैं जानती हूं कि ऐसा करने से आप विवाद से बच जाते हैं एक संघर्ष से बच जाते हैं |

परंतु मेरे प्रिय भक्तों ऐसा बचाओ एक बड़े संघर्ष को जन्म दे देता है जैसे हमारा मौन रहना अनजाने में उसका समर्थन बन जाता है और वह स्वयं को अधिक शक्तिशाली समझने लगता है और यहां से हमारा दमन प्रारंभ हो जाता है एक के बाद एक हम अन्याय अनचाहे रूप से सहते चले जाते हैं |

तो इस का तोड़ क्या है यह समझने के लिए यह जानना आवश्यक है की ऐसी कौन सी बात है जो आपको विरोध करने से रोकती है यह सामने वाले की शक्ति नहीं जो आपको रोकती है यह आपके भीतर छिपा हुआ भय है जो आपको रोकता है हां कभी-कभी यह भय आपकी सुरक्षा अवश्य कर सकता है परंतु साथ – साथ यह भी जानना आवश्यक है कि आप अपने मन से भय को निकालिए और अन्याय का विरोध कीजिए |

3# सफलता कैसे पाएं

मनुष्य जीवन की परीक्षा में सफल होने के लिए क्या नहीं करता वह परिश्रम करता है दौड़- भाग करता है पर यह सब करने के पश्चात पर उसका कार्य पूर्ण नहीं होता तो वह नकल करता है तनिक अपने बचपन के स्मृतियों को स्मरण कीजिए ,क्या स्मरण हुआ विद्यालय में जब आप परीक्षा देने जाते हैं |

तो क्या होता था आप ना सही परंतु कोई न कोई विद्यार्थी सफलता पाने के लिए नकल अवश्य करता था और उत्तीर्ण भी हो जाता था  परंतु जीवन की परीक्षा ऐसी नहीं होती नकल करने वाला सफल नहीं होता हैं |

कारण विद्यालय में सब के प्रश्न पत्र 1 होते हैं परंतु जीवन के प्रश्न पत्र भिन्न भिन्न होते हैं तो निश्चित रूप से उसके उत्तर भी भिन्न होंगे इसलिए यदि आपको जीवन में सफलता पाना है तो नकल न कीजिए स्वयं के प्रश्नों का उत्तर स्वयं ढूंढिए और सफलता आपकी होगी मेरा आशीर्वाद आपके साथ है |

 

4# क्या अधिक बोलना आपके लिए सही है.       

हमारा शरीर प्रकृति का एक महान अविष्कार है इससे जटिल संरचना संसार में और कोई नहीं हमारा शरीर जितना जटिल है यदि इसे ठीक से जाना जाए तो इससे अधिक सरल ज्ञान देने वाला और कोई नहीं हमारे शरीर में पंच इंद्रिय होती है |

जो हमें भाव  गुण और वस्तुओं का बोध कराती है हमारे पास आंखें नाक है ,स्पर्श करने के लिए त्वचा है ,ध्वनि सुनने के लिए कान है ,और जीभा है सब का भिन्न-भिन्न कार्य है आंखों से देखना कानों से सुनना, नास्य  से स्वास लेना, त्वचा से स्पर्श करना और जीवा से स्वाद लेना है |

परंतु क्या आपने कभी सोचा की प्रकृति ने हमें दो आंखें दी दो नाथ  दी दो कान दिए स्पर्श के लिए पूरा शरीर दिया परंतु जीभा केवल एक दीया ऐसा क्यों क्योंकि प्रकृति चाहती है कि हम देखे अधिक सुने अधिक और ज्ञान अधिक अर्जित करें बोले कम क्योंकि अधिक वाचाल विनाश को निमंत्रण देती है भक्तों मेरी बात को स्मरण रखिएगा |

5# क्या सत्य बोलना चाहिए 

जब सागर का जल वाष्प वन कर बादल में उड़ता है तो वह हमें दिखाई नहीं देता और मेघ अपने भीतर छुपा लेते हैं लंबी यात्रा करते हैं प्रयास करते हैं कि वह सदा उनके भीतर छुपा रहे परंतु जब वायु का वेग उन्हें उड़ा कर किसी पर्वत मे ले जाकर टकरा देता है

तब मेघ को बरस नहीं पड़ता है  क्योंकि यह नियति है यही प्रकृति है क्योंकि जल को सागर में जाकर मिलना ही है ठीक ऐसा ही हमारे साथ भी होता है हम सत्य अपने मन के मेघो में जितना छिपाने का प्रयास कर ले परंतु समय की आंधी उसे वास्तविकता के पर्वत से ले जाकर टकराकर हमारे समझ ले आते हैं

जिस भय के कारण आप सत्य को सामने लेकर नहीं आना चाहते 1 दिन वह भय हमारे समक्ष आकर खड़ा हो जाता है और फिर हम लाचार हो जाते हैं क्योंकि हमने उस भय का सामना करने की तैयारी नहीं की होती इसलिए सत्य से भागे नहीं उसे छुपाए भी नहीं उसे स्वीकार करें |

About the author

Himanshu sonkar

Hello Dosto mera nam Himanshu Sonkar hai or mujhe online aap sab ko information dena bahut hi pasand hai mera post aap logo ke kam aay is Se Jyada Badi Baat aur kuch nahi .

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